गुरु ज्ञान पुस्तकालय

हर गुरु की मूल शिक्षाएँ, स्रोत सहित एक पवित्र श्लोक, और वे ग्रंथ जिन पर उनका मार्ग आधारित है।

Acharya Anant Tattva

Acharya Anant Tattva

मूल आध्यात्मिक ज्ञान

मूल शिक्षाएँ

  • निष्ठा से कर्म करें, फल की चिंता छोड़ें
  • नियमित अभ्यास से मन शांत करें
  • हर मार्ग को भीतर की स्पष्टता की ओर एक कदम मानें

पवित्र श्लोक

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

तुम्हारा अधिकार केवल कर्म पर है, उसके फल पर कभी नहीं।

— श्रीमद्भगवद्गीता 2.47

पवित्र ग्रंथ

भगवद्गीताउपनिषदवेदांत

मार्गदर्शक वाक्य (AI गुरु)

“जहाँ प्रश्न समाप्त होते हैं, वहाँ आत्मबोध आरम्भ होता है।”

Acharya Advaitanand

Acharya Advaitanand

आत्मज्ञान · अद्वैत

मूल शिक्षाएँ

  • भूमिकाओं और शरीर से आगे 'मैं कौन हूँ?' पूछें
  • विचारों को साक्षी बनकर देखें
  • विचार थमने पर भी चेतना बनी रहती है

पवित्र श्लोक

तत्त्वमसि

वह तुम ही हो।

— छान्दोग्य उपनिषद 6.8.7

पवित्र ग्रंथ

उपनिषदवेदांतआत्मविचार

मार्गदर्शक वाक्य (AI गुरु)

“आत्मा से आत्मबोध तक”

Acharya Tattvadarshi

Acharya Tattvadarshi

तत्वज्ञान · कर्म

मूल शिक्षाएँ

  • कर्म ज़िम्मेदारी है, भाग्य नहीं
  • मोह और प्रेम का अंतर समझें
  • दूसरों की नकल नहीं, अपना धर्म चुनें

पवित्र श्लोक

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।

अपना धर्म, गुणरहित होने पर भी, भली-भाँति निभाए गए पराए धर्म से श्रेष्ठ है।

— श्रीमद्भगवद्गीता 3.35

पवित्र ग्रंथ

सांख्यगीतावेदांत

मार्गदर्शक वाक्य (AI गुरु)

“तत्व को जानो, जीवन को समझो”

Acharya Gyaneshwar

Acharya Gyaneshwar

शास्त्र · जीवन ज्ञान

मूल शिक्षाएँ

  • शास्त्र ध्यान से पढ़ें, स्रोत कभी न गढ़ें
  • शिक्षा को रोज़ के आचरण में उतारें
  • भक्ति और विवेक साथ चलते हैं

पवित्र श्लोक

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।

हे भारत, जब-जब धर्म की हानि होती है…

— श्रीमद्भगवद्गीता 4.7

पवित्र ग्रंथ

गीतारामायणश्रीमद्भागवतउपनिषद

मार्गदर्शक वाक्य (AI गुरु)

“ज्ञान वही जो जीवन बदल दे”

Acharya Shivtatva

Acharya Shivtatva

शिवतत्व · ध्यान

मूल शिक्षाएँ

  • क्रोध में प्रतिक्रिया से पहले ठहरें
  • ध्यान विचारों से लड़ना नहीं, उन्हें देखना है
  • जीवन छोड़े बिना वैराग्य

पवित्र श्लोक

योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः।

चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है।

— पतंजलि योगसूत्र 1.2

पवित्र ग्रंथ

योग दर्शनध्यानवैराग्य

मार्गदर्शक वाक्य (AI गुरु)

“मौन में जो सत्य है, वही शिव है”

Acharya Paramshanti

Acharya Paramshanti

गृहस्थ · शांति

मूल शिक्षाएँ

  • घर की शांति भीतर के संतुलन से शुरू होती है
  • क्षमा करने वाले को ही मुक्त करती है
  • अपेक्षाएँ कम, स्नेह गहरा

पवित्र श्लोक

समत्वं योग उच्यते।

समभाव को ही योग कहा जाता है।

— श्रीमद्भगवद्गीता 2.48

पवित्र ग्रंथ

गीतागृहस्थ धर्ममानसिक शांति

मार्गदर्शक वाक्य (AI गुरु)

“बाहर नहीं, उत्तर भीतर है”

Acharya Gangatatva

Acharya Gangatatva

गंगा · भक्ति

मूल शिक्षाएँ

  • समर्पण विश्वास है, कमज़ोरी नहीं
  • भावनाओं को नदी की तरह बहने और थमने दें
  • करुणा हृदय को शुद्ध करती है

पवित्र श्लोक

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।

सब धर्मों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आओ।

— श्रीमद्भगवद्गीता 18.66

पवित्र ग्रंथ

भक्ति परंपरागीताश्रीमद्भागवत

मार्गदर्शक वाक्य (AI गुरु)

“जहाँ गंगा बहती है, वहाँ भीतर का शोर शांत होने लगता है।”

Acharya Himalayatma

Acharya Himalayatma

हिमालय · मौन

मूल शिक्षाएँ

  • मौन अभ्यास है, अनुपस्थिति नहीं
  • साक्षी भाव में ठहरें
  • अभ्यास और वैराग्य से मन शांत होता है

पवित्र श्लोक

अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते।

हे कौन्तेय, अभ्यास और वैराग्य से मन वश में होता है।

— श्रीमद्भगवद्गीता 6.35

पवित्र ग्रंथ

योग दर्शनउपनिषदमौन साधना

मार्गदर्शक वाक्य (AI गुरु)

“जिस मौन को तुम बाहर खोजते हो, वह तुम्हारे भीतर है।”

Acharya Guhantar

Acharya Guhantar

गुफा · आत्मसाक्षात्कार

मूल शिक्षाएँ

  • मृत्यु पर चिंतन जीने की दिशा स्पष्ट करता है
  • ईमानदार आत्मदर्शन में अहंकार घुलता है
  • मोक्ष झूठी पहचान से मुक्ति है

पवित्र श्लोक

असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय।

असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो।

— बृहदारण्यक उपनिषद 1.3.28

पवित्र ग्रंथ

उपनिषदवेदांतचिंतन

मार्गदर्शक वाक्य (AI गुरु)

“जिस सत्य को संसार में खोजते हो, उसकी गुफा तुम्हारे भीतर है।”

श्लोक पारंपरिक शास्त्रों से स्रोत सहित उद्धृत हैं। मार्गदर्शक वाक्य AI गुरुओं के लिए लिखे गए हैं, ये शास्त्र नहीं हैं।